Gantantra Diwas Short Essay In Hindi

गणतंत्र दिवस पर छोटा निबंध। Short Essay on Republic Day in Hindi

कुटिल अंग्रेजों की दासता के कड़वे घूँट पीने और अपमानित होते रहने के बाद आजादी के दीवानों के बलिदान, लोकमान्य तिलक सावरकर सुभाष चंद्र बोस लाला लाजपत राय चंद्रशेखर आजाद जैसे आजादी के दीवानों की तपस्या तथा महामना मालवीय, गाँधी एवं पं0 नेहरू जैसे अहिंसक आंदोलनकारियों के संघर्ष के कारण अंग्रेज 15 अगस्त 1947 को भारत के शान की बागडोर भारतीय नेताओं के हाथ सौंपकर स्वदेश वापिस चले गए। पं0 जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधान मंत्री बने एवं डा0 राजेन्द्रप्रसाद प्रथम राष्ट्रपति बनाए गए। लौह पुरूष सरदार वल्लभभाई पटेल के कुशल एवं दृढ़ नेतृत्व ने भारत की सात सौ रियासतों को तिरंगे झंडे के नीचे ला दिया। इसके पशचात् स्वतंत्र भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था। इस संविधान में भारत को सर्वसत्ता संपन्न गणराज्य कहा गया है। अतः प्रतिवर्ष 26 जनवरी को समस्त भारत में गणतंत्र दिवस बड़ी धूम-झाम से मना जाता है।

इस दिन दिल्ली में समारोहों की छटा निराली होती है। विजय चौक से प्रारंभ हो कर लालकिले तक जाने वाली परेड इस पर्व का विशेष आकर्षण होता है। इस समारोह को देखने के लिए लोग सुबह से ही राजपथ के दोनो ओर इकट्ठे होना शुरू हो जाते हैं। सुबह आठ बजे के लगभग प्रधानमंत्री एवं सभी गणमान्य लोग यहाँ एकत्र होते हैं। राष्ट्रपति की सवारी सबसे अंत में यहाँ पहुचती है प्रधानमंत्री एवं अन्य गणमान्य लोग राष्टपति की अगवानी करते हैं और राष्टपति को सलामी मंच तक पहुँचाकर अपना-अपना स्थान ग्रहण करते हैं। इसके पश्चात् तोपों की सलामी के बाद परेड प्रारंभ होती है। सर्वप्रथम सेना के तीनों अंगो की टुकड़ियाँ राष्ट्रपति को सलामी देती हुई आगे निकल जाती है। पुलिस तथा पैरा मिलिट्री बलों के जवान भी मार्च पास्ट करते हुए मंच के सामने से गुजरते हैं। एन0 सी0 सी0 के युवक बच्चों की कदम-ताल भी देखने योग्य होती है। राजधानी एवं दूसरे प्रदेशों से आए बच्चों की टोलियाँ अपनेःअपने करतब दिखाती हुई मंच के सामने से गुजरती हैं जो कि सभी को बहुत आकर्षित करती है। सभी प्रदेशों एवं केंद्र शासित राज्यों की झाँकियँ बहुत ही मनोरम दृश्य प्रस्तुत करती हैं.

हमारा कर्तव्य है कि भारतीय गणतंत्र की वर्षगाँठ के साथ हम प्रण करे कि भारत की स्वतंत्रता तथा संविधान की मर्यादा बनाए रखने के लिए हम हर संभव प्रयास करेंगे। जय हिंद। 

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गणतंत्र दिवस पर निबंध | Essay on Republic Day in Hindi!

गणतंत्र दिवस भारत का राष्ट्रीय पर्व है । यह दिवस भारत के गणतंत्र बनने की खुशी में मनाया जाता है । 26 जनवरी, 1950 के दिन भारत को एक गणतांत्रिक राष्ट्र घोषित किया गया था । इसी दिन स्वतंत्र भारत का नया संविधान अपनाकर नए युग का सूत्रपात किया गया था । यह भारतीय जनता के लिए स्वाभिमान का दिन था । संविधान के अनुसार डॉ. राजेन्द्र प्रसाद स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने । जनता ने देश भर में खुशियाँ मनाई । तब से 26 जनवरी को हर वर्ष गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है ।

26 जनवरी का दिन भारत के लिए गौरवमय दिन है । इस दिन देश भर में विशेष कार्यक्रम होते हैं । विद्‌यालयों, कार्यालयों तथा सभी प्रमुख स्थानों में राष्ट्रीय झंडा तिरंगा फहराने का कार्यक्रम होता है । बच्चे इनमें उत्साह से भाग लेते हैं । लोग एक-दूसरे को बधाई देते हैं । स्कूली बच्चे जिला मुख्यालयों, प्रांतों की राजधानियों तथा देश की राजधानी के परेड में भाग लेते हैं । विभिन्न स्थानों में सांस्कृतिक गतिविधियाँ होती हैं । लोकनृत्य, लोकगीत, राष्ट्रीय गीत तथा विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम होते हैं । देशवासी देश की प्रगति का मूल्यांकन करते हैं ।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्य कार्यक्रम राजधानी दिल्ली में होता है । विजय चौक पर मंच बना होता है तथा दर्शक दीर्घा होती है । राष्ट्रपति अपने अंगरक्षकों के साथ यहाँ पधारते हैं और राष्ट्रध्वज फहराते हैं । उन्हें 21 तोपों की सलामी दी जाती

है । सेना के बैंड राष्ट्रगान की धुन गाते हैं । राष्ट्रपति परेड का निरीक्षण करते हैं । परेड में विभिन्न विद्‌यालयों के बच्चे, एन.सी.सी. के कैडेट्‌स पुलिस अर्द्धसैनिक और सेना के जवान भाग लेते हैं । परेड को देखने नेतागण, राजदूत और आम जनता बड़ी संख्या में आती है । इस अवसर पर किसी राष्ट्राध्यक्ष को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है ।

गणतंत्र दिवस की परेड का दृश्य बहुत आकर्षक होता है । सेना और अर्द्धसैनिक बलों की टुकड़ियाँ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ती हैं । परेड के बाद झांकियों का दृश्य सलामी मंच के सामने से गुजरता है । एक से बढ्‌कर एक सजी- धजी झाकियाँ । किसी में कश्मीर के शिकारे का दृश्य तो किसी में महात्मा बुद्ध की शांत मुद्रा की झलक । किसी में महाराणा प्रताप अपने घोड़े चेतक पर नजर आते है तो किसी में रणचंडी बनी लक्ष्मीबाई । किसी-किसी झाँकी में नृत्यांगनाएँ नाचती-गाती सबको मंत्रमुग्ध किए चलती हैं । विभिन्न राज्य अपनी झाँकी में अपनी संस्कृति को दर्शाते हैं । बहादुर बच्चे हाथी या जीप पर सवार होकर बहुत प्रसन्न दिखाई देते है । गणतंत्र दिवस के समारोह में राष्ट्रपति देश के निमित्त असाधारण वीरता प्रदर्शित करनेवाले सेना और पुलिस के जवानों को वीरता पुरस्कार एवं पदक प्रदान करते है ।

गणतंत्र दिवस अपनी उपलब्धियों के मूल्यांकन का दिन है । गणतंत्र भारत ने कौन-कौन सी मंजिलें तय कर लो और किन-किन मंजिलों की छूना अभी बाकी है इसकी समीक्षा की जाती है । अखबारों और पत्रिकाओं मैं इससे संबंधित अनेक रिपोर्टें छपती हैं । टेलीविजन पर रंगारंग कार्यक्रम होते हैं । जगह-जगह पर कव्वालियों, मुशायरों और कवि सम्मेलनों की घूम मची रहती है राजधानी की मरकारा इमारतों पर मनमोहक रोशनी की जाती है । राष्ट्र अपने गणतंत्र पर गर्व महसूस करता है ।

गणतंत्र दिवस पर राष्ट्र अपने महानायकों को स्मरण करता है । हजारों-लाखों लोगों की कुर्बानियों के बाद देश को आजादी मिली अंगे फिर राष्ट्र गणतंत्र बना । स्वतंत्रता हमें भीख में नहीं मिली । कइयों ने इसके लिए अपनी जान गँवायी । महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू, लाला लाजपतराय, बाल गंगाधर तिलक, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं ने जान की बाजी लगा दी । इन्होंने देशवासियों क सामने जीवन-मूल्य रखे । हमारा गणतंत्र इन्हीं जीवन-मूल्यों पर आधारित है । अत: इनकी रक्षा की जानी चाहिए । समय, व्यक्ति की गरिमा, विश्व बंधुत्व, सर्वधर्म-समभाव, सर्वधर्म-समभाव, धर्मनिरपेक्षता गणतंत्र के मूलतत्व हैं । अपने गणतंत्र को फलता-फूलता देखने के लिए हमें इन्हें हृदय में धारण करना होगा ।

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